एक ऐसा असुर जिसके रक्त की हर बूंद से जन्म लेते थे नए अंधक — फिर महादेव ने उसी को अपना गण क्यों बनाया?
एक ऐसा असुर जिसके रक्त की हर बूंद से जन्म लेते थे नए अंधक — फिर महादेव ने उसी को अपना गण क्यों बनाया? शिव पुराण में अंधक की कथा केवल एक असुर-वध की कहानी नहीं है। यह कथा शुरू होती है महादेव और माता पार्वती की एक लीला से। फिर एक ऐसा बालक जन्म लेता है जो देखने में असाधारण और जन्म से अंधा है। महादेव उसे एक दैत्यराज को पुत्र के रूप में दे देते हैं। वही बालक आगे चलकर हजारों वर्षों तक ऐसी तपस्या करता है कि देवताओं को भी चिंता होने लगती है। ब्रह्मा उसे ऐसे वरदान देते हैं कि देवताओं, दैत्यों, मनुष्यों और स्वयं शिव तथा विष्णु से भी मृत्यु की सुरक्षा उसे मिल जाती है। वह तीनों लोकों को अपने अधीन कर लेता है। लेकिन फिर एक दिन उसकी दृष्टि कैलाश की ओर जाती है। वहाँ उसे एक अद्भुत योगी दिखाई देता है। उस योगी के पास एक ऐसी स्त्री बैठी है जिसकी सुंदरता देखकर अंधक की बुद्धि पर काम का प्रभाव पड़ जाता है। वह नहीं जानता कि जिस स्त्री को पाने के लिए वह युद्ध करने जा रहा है, वह स्वयं माता पार्वती हैं। और जिस योगी को वह साधारण तपस्वी समझ रहा है— वह स्वयं महादेव हैं। इसके बाद जो युद्ध होता है, उसमें देवता...