महादेव का दुर्लभ श्लोक: त्याग, मौन और साक्षी भाव का रहस्य
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🕉️ दुर्लभ शिव श्लोक
📜 श्लोक (संस्कृत)
न कर्मणा न प्रजया धनेन त्यागेनैके अमृतत्वमानशुः। शिवः साक्षी केवलो निरालम्बः स एव बन्धुर्न च कश्चिदन्यः॥
⚠️ यह श्लोक उपनिषदिक भावधारा से जुड़ा है,
पर शिव-तत्त्व को सीधे दर्शाता है — इसलिए शिव साधना में प्रयुक्त होता है।
🌿 हिंदी अर्थ
न कर्म से,
न संतान से,
न धन से अमरत्व मिलता है।
जो छोड़ देना सीख लेता है,
वही शांति को छू पाता है।
शिव किसी सहारे पर नहीं टिके —
वे स्वयं साक्षी हैं।
और जब सब साथ छोड़ दें,
तब भी शिव साथ रहते हैं।
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